हैदराबाद/नई दिल्ली, टोल टैक्स के लिए ‘‘उपग्रह आधारित पथकर प्रणाली’’ यानी सैटेलाइट बेस्ड टोल टैक्स शुरू करने पर केंद्र सरकार विचार कर रही है। जिसके तहत टोल नाके अब नहीं होंगे और गाड़ी चालकों को केवल उतनी दूरी का ही टोल देना होगा जितनी दूरी वो तय करेंगे। ये आम भारतीयों के लिए अनूठा अनुभव होगा साथ ही इस नायाब प्रयोग से सरकार के राजस्व में इजाफा होगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में ये जानकारी दी। इस नायाब प्रयोग के चलते लोगों के टोल टैक्स देयता में भी कमी आएगी।

कैसे काम करेगा सैटेलाइट बेस्ड टोल टैक्स प्रणाली?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार टोल टैक्स के लिए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सैटेलाइट बेस्ड टोल टैक्स टेक्नोलॉजी लाने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से पहले देश में यह व्यवस्था लागू करने का केंद्र सरकार का पूरा प्रयास होगा। नितिन गडकरी ने कहा ‘‘इस व्यवस्था के तहत टोल नाके हटा दिए जाएंगे। लोगों को कहीं रुकने की जरूरत नहीं होगी। लोगों के वाहन की नंबर प्लेट की फोटो ली जाएगी और जहां से प्रवेश होगा और जहां से निकलेंगे, केवल इतनी ही दूरी का टोल टैक्स लिया जाएगा और यह राशि वाहन चालक के बैंक खाते से काट ली जाएगी।’’

Poultary

एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि टोल बूथ से हर दिन औसत संग्रह से 49 हजार करोड़ रुपये की आय होती है। उन्होंने कहा ‘‘फास्ट टैग व्यवस्था का उपयोग 98.5 प्रतिशत लोगों ने उपयोग किया है तथा 8.13 करोड़ फास्ट टैग जारी किए गए हैं। इसके तहत हर दिन औसतन 170 से 200 करोड़ रुपये का पथकर आता है।’’

गडकरी ने बीओटी परियोजना से जुड़े एक सवाल के जवाब में बताया कि जब उन्होंने परिवहन मंत्री का पद संभाला था तब तीन लाख 85 हजार करोड़ रुपये के 406 परियोजनाएं बंद पड़ी थे तथा बैंकों में तीन लाख करोड़ रुपये का एनपीए (गैर निष्पादक आस्तियां) पड़ा था. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्ष में बैंकों के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों की बैठक बुला कर समाधान निकाला गया. उन्होंने बताया ‘‘हमने 20 प्रतिशत परियोजनाएं रद्द कर दी. यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि हमने भारतीय बैंकों को तीन लाख करोड़ के एनपीए से बचाया.’’

‘बनाओ, चलाओ और सौंप दो’ (बीओटी) परियोजना आमतौर पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी में उपयोग किया जाने वाला एक मॉडल है. गडकरी ने बताया कि बीओटी के लिए उन्होंने एक नयी व्यवस्था पर विचार किया है. उन्होंने बताया कि पुणे से औरंगाबाद तक एक्सप्रेस हाइवे बनाया जा रहा है जिसे बीओटी के माध्यम से तैयार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए वर्तमान रास्ते में आने वाले चार पथकर बीओटी परिचालक को दे दिए जाएंगे. परिचालक इसके लिए अपने पास से धन राशि लगा कर काम करेगा. उन्होंने कहा कि फिलहाल बीओटी परियोजना के तहत कोई समस्या नहीं है.

धार्मिक पर्यटन के लिए और बेहतर सुविधा का वादा

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को अच्छी सड़कें मिलें, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि 22 हजार करोड़ रुपये खर्च कर बुद्ध सर्किट बनाया गया और फोर लेन से जोड़ा गया. इसी तरह से 30 हजार करोड़ रुपये की लागत से अयोध्या सर्किट भी बनाया गया जिसमें राम की वन यात्रा से लेकर नेपाल स्थित सीता की जन्मस्थली को भी जोड़ा गया. उन्होंने बताया कि सिख धर्म में पांच तख्त हैं जिनमें से तीन पंजाब में, एक बिहार में और एक महाराष्ट्र के नांदेड़ में आता है. लगभग इन सभी पांच तख्तों को चार लेन से जोड़ा गया है. गडकरी के अनुसार, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने बताया कि चार धाम का काम अभी आधा ही हुआ है लेकिन बड़ी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं. ऐसे में 49 प्रतिशत व्यय रोजगार सृजन के लिए होता है. हेमकुंड साहिब तक संपर्क के बारे में गडकरी ने कहा कि वहां रोप वे बनाया जा रहा है और यह उपयोगी भी है क्योंकि हिमाचल प्रदेश में सड़क बनाना बहुत मुश्किल है.

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